Wednesday, January 21, 2009

प्रशिक्षक

रयु कोन कई इंडिया के मुख्य प्रशिक्षक

डॉ. सेंसी, विजय क. तम्बद्कर,

(४थ दान कराटे ,३र्ड दान कोबुदो)

ओकीनावा कराटे कोबुदो रयुकोनकाई इंडिया के मुख्य प्रशिक्षक है।

भारतीय शाखा में होने वाले सेमिनार्स,कैम्पस,भारत में हमारी शाखा (दोजो)स्थिति और किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इनसेसंपर्क कर सकते है।

सेंसी, मयूर शुकल,

(३र्ड दान कराटे,१स ट् दान कोबुदो)

मुंबई उपनगर में रयुकोनकाई इंडिया दोजो के प्रमुख प्रशिक्षक।

सेंसी,विजय स. शिग्वान,

(३र्ड दान कराटे ,१स्त दान कोबुदो)

ठाणे उपनगर में रयुकोनकाई इंडिया दोजो के प्रमुख प्रशिक्षक।


Wednesday, November 26, 2008

संपर्क

संपर्क



संपर्क करे सेंसी, विजय तम्बद्कर , मुख्य प्रशिक्षक और प्रतिनिधी ऑफ़ ओकिनावा कराटे कोबुदो रयुकोंकई इंडिया भारतीय शाखा सेकिसी भी सेमीनार, ट्रेनिंग कैंप और किसी भी नजदीकी क्लास के बारे में अधिक जानकारी के लिए इन्हे संपर्क करे


नाम: सेंसी, विजय क. तम्बद्कर

(रीप्रेसेनटेटिव और चीफ इंस्ट्रक्टर ऑफ़ इंडिया)

पत्ता :४१, सेकंड मैरीन स्ट्रीट,3rd फ्लोर ,

धोबितालाओ,मुंबई- ४००००२,

महाराष्ट्र स्टेट (इंडिया)

फ़ोन :०२२- २२०७२८९१

मोबाइल नं :०९२२४६९०६१९/ ०९२७०३४४५०४

-मेल : vijtam@hotmail.com


रयुकोंकई इंडिया की इंग्लिश वेब साईट

:http://ryukonkaiindia.webs.com

संपर्क करे सेंसी, मयूर शुकल,चीफ इन्स्त्रुक्टोर ऑफ़ मुंबई,दोजो(क्लास) ऑफ़ रयुकोंकई इंडिया.

पत्ता: श्री कृष्ण बल्वादी हॉल, नार कार्निक पथोलोग्य

लाबोरातोरी, श्री कृष्ण नगर, बोरीवली (ईस्ट),

मुंबई- ४०००६६.महाराष्ट्र,इंडिया.

मोबाइल नं: ९२२४६३५२४६/ ९८९२९७३९०७

-मेल: mayur.ryukonkai@gmail.com/

mayur.ishtaa@yahoo.co.in

संपर्क करे सेंसी,विजय स. शिग्वन, चीफ इन्स्त्रुक्टोर

ऑफ़ थाना,दोजो ऑफ़ रयुकोंकई इंडिया.

पत्ता: शिव समर्थ क्रीडा मंडल, नार हिरा पन्ना बिल्डिंग,

गोकुल विल्लगे, शान्ति पार्क, मीरा रोड (ईस्ट),

थाना-४०११०७ ,महाराष्ट्र,इंडिया.


मोबाइल नं: ९९६७६११२८८/९८९२१८६३२४

-मेल: Vijays. Shigwan@yahoo.com


Friday, November 14, 2008

कोबुदो





कराटे कोबुदो रयु कोन काई इंड़ीया की हथियार टेक्निक

कोबुदो


कोबुदो यह मार्शल आर्ट ओकीनावा में विकसित हुई है, जिसके अदंर खेती करने की मछली पकड़ने कि औजरो को विकसित हथियारों में बदल दिया।रयु क्यों कोदुदो के इतिहास के दो बहुत हे बड़े और महत्व पूर्ण ऐतिहासिक कारण है। उनमे पहला कारन कारण राजा शोस्हीं के द्वारा 'स्वोर्ड हंट' नामक आदेश जो कि सन १४७७-१५२६ में जारी किया गया, सन १४७७-१५२६ के मध्य में हथियारों को धारण ना करने का आदेश जरी किया और यह आदेश आम लोगो के लिए ही नही बल्कि अमीर लोगो के लिये भी था, और दुसरा कारन "पॉलिसी ऑफ़ बैनिंग वेपोन्स" अर्थात हथियारों पर पाबन्दी नामक आदेश के बाद सन १६०९ में रयुक्यु इन्वार्सुओं के पस्चात सेत्सुमा जो कि वह एक मार्शल आर्टिस्ट ने इस बात पर जोर दिया कि आम औजारों को हम किस तरह एक काबिल सुशक्त बचावी हथियार के रूप में उपियाग कर शके। उन्हो ने लगातार निरिक्षण और आधयन से उन्होंने एक नया मार्शल आर्ट स्कूल बनाया जिसका नाम ओकीनावा आर्ट्स विथ वेपोनरी जिसे कि हम यस "कोबुदो" के नाम से जानते है।

१९वी शताब्दी में "कोबुदो" बहुत ही विकसित हो गई और इसके कई विभाग बन गई।



ओकिनावा कराटे कोबुदो रयु कोन काई इंडिया


रयु क्यु कोबुदो रयु कोन काई कोबुदो स्टाइल

हंशी, कोतारों ईहा के द्वारा बनाया गया है ,जो की एक कोबुदो (हथियार) शिक्षक टीचर के रूप में ओकिनावा (जापान) तथा विश्व में कोबुदो (हथियार) शिक्षक के रूप में शिखा रहे है।ओकिनावा कराटे कोबुदो रयुकोनकई इंडिया कराटे-दो और रयु क्यु कोबुदो रयुकोनकाई

अस्सोसिअशन्स के बीच में बहुते नजदीकी सम्बन्ध है । रयुकोनकाई

को बनाने वाले , कोतारों इहा इन्होने कराटे-दो की शिक्षा ओ'सेन्सी युचोकू हिगा

के मार्गदर्शन पे लिया है ,शोरिन रयु क्युडोकान कराटे-डु के वर्तमान निर्माता

क्युडोकान प्रेजिडेंट मिनोरू हिगा सेंसी जो की वाइस प्रेजिडेंट ऑफ़ रयुकोनकाई कोबुदो

असोसिएशन के रूप में कार्य कर रहे है. तथा, क्युदोकन टेक्नीकल निर्देशक हँसी ऑस्कर हिगा

रिप्रेजेनटेटिव के रूप में पुरे यूरोप के रयु क्यु कोबुदो रयुकोनकाई रिप्रेजेनटेटिव

के रूप में कार्य कर रहे है , और क्युदोकन दक्षिण अमेरिकन रिप्रेजेनटेटिव बेनीटो हिगा सेंसी दक्षिण अमेरिकन रिप्रेजेनटेटिव ऑफ़ रयुकोनकई कोबुदो असोसिएशन में कार्य कर रहे है

विजय क. तम्बड़कर सेंसी जो की रयु क्यू कोबुदो रयुकोनकाई के हंशी ऑस्कर हिगा

के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया है, जो की भारत के

रिप्रेजेनटेटिव रयुक्यु कोबुदो रयुकोंकई इंडिया असोसिएशन के रूप में कार्य कर रहे है


कोतारों ईहा सेंसी (९थ दान-हंशी)


कोतारों इहा सेंसी फ़रवरी १२, १९३९ जन्म हुआ था. १९५८ में उन्होंने प्रसिद्ध शोरिनरयु कराटे शिक्षक चिबाना चोस्हीं के तहत अपनी मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण शुरू कर दिया. स्कूल में, इह सेन्सी की जुझारू कला में रुचि थी और एक स्थानीय जूडो क्लब में शामिल हो गए। उनकी सफलता अपने छोटे कद के कारण सीमित था। हाई स्कूल से स्नातक होने के बाद, ईहा सेन्सी ने कराटे शिखने का निर्णय लिया,क्योंकि इससे उनको लगा की उनके युद्ध कला में सुधर होगा।इन्होने जल्दही यहाँ जान लिया की कराटे में बड़े कद के विद्यार्थी को काफी फायदा होता है,और इससे प्रेरित होकर इन्होने हथियार कला को अपनाया और खास कर की बो(लाठी) में क्योंकि, बो(लाठी) के लम्बाई और किसी भी हथियार से बहुत जादा होता है।

१९७४ ईहा सेन्सी ने गुशिकवा ,ओकिनावा में अपने ही घर में अपनी पहली कोबुदो दोजो खोला। १९८१ में उन्होंने और रयुक्यू कोबुदो रयुकोनकाई की स्थापना इसे राष्ट्रपति नियुक्त किया गया था।



  • मई १९५८, चिबाना चोसिं सेन्सी के तहत शोरिन-रयु कराटे का प्रशिक्षण शुरू कर दिया।

  • फ़रवरी १९६१, वह योचोकू हिगा के तहत प्रशिक्षण शोरिन-रयु कराटे शुरू किया।
  • मई 1961, वह शिगेनोबू तमाई अंतर्गत बो प्रशिक्षण शुरू हुआ.
  • मई 1968, वह इलोएई इशिकावा तहत नुन्चाकू, साई, और कामा का प्रशिक्षण शुरू किया.
  • जनवरी 1970, वह शिको तोमा अंतर्गत बो और साई का प्रशिक्षण शुरू हुआ।
  • मार्च 1971, वह कन्तोकू इज़ुमिकावा के अंतर्गत बो प्रशिक्षण शुरू हुआ।
  • मार्च 1972, वह ताकाषा किन्जो और जुल्य के तहत इकु प्रशिक्षण लिया ।
  • जुलाई 1972, बो शिन्चिन तावता के अंतर्गत प्रशिक्षण लिया।

  • रयु कोन काई दोजो कुन


  • विनम्र और अनुशासित रहो तथा एक अच्छे नागरिक तरह व्यवहार करो
  • अपनी शारीरिक शक्ति अपनी मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति को प्रशिक्षित करने के उदेश्य से कार्य करो।क्युकी सहनशक्ति ही सफलता की कुंजी है।
  • अपने से वरिष्ठ का सम्मान करो और अपने से जूनियर को प्यार करो। और दोजो में सभी सदस्यों को भाई और बहनों के रूप में आदर करो।
  • आपातकालीन स्थिति के लिए सबसे कुशल कौशल बचाव की तैयारी को मास्टर करने की कोशिश करो।

  • रयु कोन काई इंडिया हथियार कला


    वहाँ बहुत से कृषि उपकरण तथा मत्स्यमारी औजारों को विभिन्न शिक्षकों के अनुभव और ज्ञान से कोबुदो हथियार के रूप में और के अनुसार विकसित किया। इनमे से कुछ हथियारों के बो, साईं,नुन्चाकू, तोंफा, एइकू, कामा, तेक्को , सुरूचिन , रोचिन और तिन्बे, कुवा, नागिनाता, नुनते, शकुहाची इत्यादि.

    http://www.sakidskarate.drulie.com/images/bo2.jpg

    बो (कुन)-लाठी

    बो या लाठी और स्टाफ मास्टर्स के सबसे मुश्किल और मुख्य हथियार है।इस रोकुशाकू बो (6 फुट स्टाफ) सामान्यतः प्रयोग किया जाता है।लेकिन, बो(लाठी) की लंबाईया भिन्न भिन्न होती है ओकिनावान के लोग स्टाफ बो(लाठी) इस्तमाल लंबी दूरी तय करने केलिए और खेती में कार्यकरने के लिए करते थे। आज कई बो(लाठी) काता(रिद्हम) से बहुत से देशो के हाथो में है




    साई

    साईं एक कम तीन आयामी धातु त्रिशूल है. यह

    कहा गया है कि भारत में पैदा हुआ और चीन के माध्यम से ओकिनावा(जापान) में पंहुचा। एक धार्मिक रूप में प्रयोग किया गया वस्तु था। लेकिन कुछ लोगों को यह एक ऐसा ओजार लगा जिसका उपयोग भूमि खुदाई करने के लिए कृषि या मछली पकड़ने में मछली मारने के लिए हथियार के रूप में

    काम करते थे। तथा बाद में इसे भी कोबुदो हथियारों में जोड़ा गया।


    नुन्चाकू


    इस का मूल घोडे की लाकडे की मूठ वाली लगामो से जुड़ी है
    हथियार की लकड़ी के दो टुकड़ों से जुड़े हैं
    धागा, गर्भनाल, चेन या घोड़े के बाल से बना, नुन्चाकू एक चीनी मूल है

    .



    तोंफा (तुइफा)

    मूल रूप से तोंफा एक ओकिनावा के सान जोड़े में आते हैं इनका उदय पैरिस में हुआ है और कुछ देशों के पुलिस विभाग बटोंस के रूप में तोंफा का उपयोग करते है।

    कामा
    इसे हसुआ या कामा कृषि में प्रयोग किया जाता है
    ओकिनावा में प्रयोजनों और एक घातक हथियार बन गया है,
    इसे जोड़े में एक हथियार के रूप में प्रयोग किया जाता हैं

    एइकू (कई)

    नाव खेना ओकिनावा मछुआरा द्वारा इस्तेमाल किया गई वास्तु है इसकी तकनीक को बो के समान उपयोग की जाती हैं यह प्रतिद्वंद्वी के आँखें में रेत फेंकने की तकनीक शामिल है.



    संसेत्सू कुन

    संसेत्सू कुन ये तीन स्टाफ नुन्चाकू है।यह
    एक चीनी मूल है.चीन में इस हथियार के जन्म पर एक कहानी है,
    एक बार की बात है कहते है एक राजा अपने क्षेत्र में एक प्रसिद्ध सेनानी के साथ लड़ा था।राजा
    अपने में स्टाफ(bo) चुना और अन्य ने एक तलवार का इस्तेमाल किया.
    तलवार की वजह से स्टाफ के तीन हो गए थे। लेकिन वे अभी भी एक दुसरे से जुड़े थे।
    यह नया हथियार की लड़ाई में बेहतर काम करता था। और इसीसे
    तीन स्टाफ नुन्चाकू के जन्म की गई



    तेक्को

    इस हथियार कई रूप है और प्रत्येक का अपना
    खुद का मूल। तेक्को और गाठ -झाडन कहा जाता है कि आम धातु तेक्को
    या पोर-झाड़न मूल रूप से इस होर्सेशोएस गया था। और ये जोड़े में आते हैं.

    तोंफा के विरोध समुराई(बचाओ)

    तोंफा के विरोध समुराई (प्रहार)

    (नुन्चाकू के विरोध समुराई)