कराटे कोबुदो रयु कोन काई इंड़ीया की हथियार टेक्निक

कोबुदो
कोबुदो यह मार्शल आर्ट ओकीनावा में विकसित हुई है, जिसके अदंर खेती करने की मछली पकड़ने कि औजरो को विकसित हथियारों में बदल दिया।रयु क्यों कोदुदो के इतिहास के दो बहुत हे बड़े और महत्व पूर्ण ऐतिहासिक कारण है। उनमे पहला कारन कारण राजा शोस्हीं के द्वारा 'स्वोर्ड हंट' नामक आदेश जो कि सन १४७७-१५२६ में जारी किया गया, सन १४७७-१५२६ के मध्य में हथियारों को धारण ना करने का आदेश जरी किया और यह आदेश आम लोगो के लिए ही नही बल्कि अमीर लोगो के लिये भी था, और दुसरा कारन "पॉलिसी ऑफ़ बैनिंग वेपोन्स" अर्थात हथियारों पर पाबन्दी नामक आदेश के बाद सन १६०९ में रयुक्यु इन्वार्सुओं के पस्चात सेत्सुमा जो कि वह एक मार्शल आर्टिस्ट ने इस बात पर जोर दिया कि आम औजारों को हम किस तरह एक काबिल सुशक्त बचावी हथियार के रूप में उपियाग कर शके। उन्हो ने लगातार निरिक्षण और आधयन से उन्होंने एक नया मार्शल आर्ट स्कूल बनाया जिसका नाम ओकीनावा आर्ट्स विथ वेपोनरी जिसे कि हम यस "कोबुदो" के नाम से जानते है।
१९वी शताब्दी में "कोबुदो" बहुत ही विकसित हो गई और इसके कई विभाग बन गई।

रयु क्यु कोबुदो रयु कोन काई कोबुदो स्टाइल
हंशी, कोतारों ईहा के द्वारा बनाया गया है ,जो की एक कोबुदो (हथियार) शिक्षक टीचर के रूप में ओकिनावा (जापान) तथा विश्व में कोबुदो (हथियार) शिक्षक के रूप में शिखा रहे है।ओकिनावा कराटे कोबुदो रयुकोनकई इंडिया कराटे-दो और रयु क्यु कोबुदो रयुकोनकाई
अस्सोसिअशन्स के बीच में बहुते नजदीकी सम्बन्ध है । रयुकोनकाई
को बनाने वाले , कोतारों इहा इन्होने कराटे-दो की शिक्षा ओ'सेन्सी युचोकू हिगा
के मार्गदर्शन पे लिया है ,शोरिन रयु क्युडोकान कराटे-डु के वर्तमान निर्माता
क्युडोकान प्रेजिडेंट मिनोरू हिगा सेंसी जो की वाइस प्रेजिडेंट ऑफ़ रयुकोनकाई कोबुदो
असोसिएशन के रूप में कार्य कर रहे है. तथा, क्युदोकन टेक्नीकल निर्देशक हँसी ऑस्कर हिगा
रिप्रेजेनटेटिव के रूप में पुरे यूरोप के रयु क्यु कोबुदो रयुकोनकाई रिप्रेजेनटेटिव
के रूप में कार्य कर रहे है , और क्युदोकन दक्षिण अमेरिकन रिप्रेजेनटेटिव बेनीटो हिगा सेंसी दक्षिण अमेरिकन रिप्रेजेनटेटिव ऑफ़ रयुकोनकई कोबुदो असोसिएशन में कार्य कर रहे है
विजय क. तम्बड़कर सेंसी जो की रयु क्यू कोबुदो रयुकोनकाई के हंशी ऑस्कर हिगा
के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया है, जो की भारत के
रिप्रेजेनटेटिव रयुक्यु कोबुदो रयुकोंकई इंडिया असोसिएशन के रूप में कार्य कर रहे है ।
कोतारों इहा सेंसी फ़रवरी १२, १९३९ जन्म हुआ था. १९५८ में उन्होंने प्रसिद्ध शोरिनरयु कराटे शिक्षक चिबाना चोस्हीं के तहत अपनी मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण शुरू कर दिया. स्कूल में, इह सेन्सी की जुझारू कला में रुचि थी और एक स्थानीय जूडो क्लब में शामिल हो गए। उनकी सफलता अपने छोटे कद के कारण सीमित था। हाई स्कूल से स्नातक होने के बाद, ईहा सेन्सी ने कराटे शिखने का निर्णय लिया,क्योंकि इससे उनको लगा की उनके युद्ध कला में सुधर होगा।इन्होने जल्दही यहाँ जान लिया की कराटे में बड़े कद के विद्यार्थी को काफी फायदा होता है,और इससे प्रेरित होकर इन्होने हथियार कला को अपनाया और खास कर की बो(लाठी) में क्योंकि, बो(लाठी) के लम्बाई और किसी भी हथियार से बहुत जादा होता है।
१९७४ ईहा सेन्सी ने गुशिकवा ,ओकिनावा में अपने ही घर में अपनी पहली कोबुदो दोजो खोला। १९८१ में उन्होंने और रयुक्यू कोबुदो रयुकोनकाई की स्थापना इसे राष्ट्रपति नियुक्त किया गया था।

रयु कोन काई
वहाँ बहुत से कृषि उपकरण तथा मत्स्यमारी औजारों को विभिन्न शिक्षकों के अनुभव और ज्ञान से कोबुदो हथियार के रूप में और के अनुसार विकसित किया। इनमे से कुछ हथियारों के बो, साईं,नुन्चाकू, तोंफा, एइकू, कामा, तेक्को , सुरूचिन , रोचिन और तिन्बे, कुवा, नागिनाता, नुनते, शकुहाची इत्यादि.



बो या लाठी और स्टाफ मास्टर्स के सबसे मुश्किल और मुख्य हथियार है।इस रोकुशाकू बो (6 फुट स्टाफ) सामान्यतः प्रयोग किया जाता है।लेकिन, बो(लाठी) की लंबाईया भिन्न भिन्न होती है ओकिनावान के लोग स्टाफ बो(लाठी) इस्तमाल लंबी दूरी तय करने केलिए और खेती में कार्यकरने के लिए करते थे। आज कई बो(लाठी) काता(रिद्हम) से बहुत से देशो के हाथो में है

साई
साईं एक कम तीन आयामी धातु त्रिशूल है. यह
कहा गया है कि भारत में पैदा हुआ और चीन के माध्यम से ओकिनावा(जापान) में पंहुचा। एक धार्मिक रूप में प्रयोग किया गया वस्तु था। लेकिन कुछ लोगों को यह एक ऐसा ओजार लगा जिसका उपयोग भूमि खुदाई करने के लिए कृषि या मछली पकड़ने में मछली मारने के लिए हथियार के रूप में
काम करते थे। तथा बाद में इसे भी कोबुदो हथियारों में जोड़ा गया।




तोंफा (तुइफा)




एइकू (कई)
नाव खेना ओकिनावा मछुआरा द्वारा इस्तेमाल किया गई वास्तु है इसकी तकनीक को बो के समान उपयोग की जाती हैं यह प्रतिद्वंद्वी के आँखें में रेत फेंकने की तकनीक शामिल है.
संसेत्सू कुन
यह नया हथियार की लड़ाई में बेहतर काम करता था। और इसीसे




तोंफा के विरोध समुराई(बचाओ)

तोंफा के विरोध समुराई (प्रहार)

(नुन्चाकू के विरोध समुराई)

0 टिप्पणियाँ:
Post a Comment